Tuesday, August 22, 2017

असुर

कुछ लोग
अपने इसी जीवन के
एक हिस्से में
बन जाते हैं
मानव से असुर,
वैसे ही जैसे
शास्त्रों में वर्णित हैं
असुर
बड़े बड़े दांतो वाले
झबरैले बालों वाले।

वे बन जाते हैं असुर !
क्योंकि
उन्हें ठगा है देवताओं ने !
उनसे झूठ बोला है
देवताओं ने !

वे स्वर्ग पर
करतें है हमला
अप्सराओं के लिए नहीं
उसे तहस नहस करने के लिए !

Monday, August 21, 2017

झूठी आशा

कविता से
नहीं होगा कोई समाज सुधार
कोई क्रान्ति भी नहीं आयेगी
न ही भरेगा किसी भूखे का पेट !

कविता
बस
सब कुछ ठीक हो जाने की
झूठी आशा का
एक सिरा है !

जी लोगे बिना इसके ?