Thursday, August 17, 2017

कुछ शब्द


ढूंढता हूं
कुछ शब्द
छुपा सकें जो
गहरे
मेरे सन्नाटों को !
रच सकें जो
ऐसी कोख
जिसमें दफ्न हो
सकूं मैं !
कह सकें
वे वह कुछ
जो कहा नहीं
जाना है