Monday, June 11, 2018

शाम और किताब

शाम को
जब मैं पढ़ता हूं
अपनी टेबल
खिड़की के पास रखता हूं !
पढ़ी जा रही किताब से
हो रही बातचीत के दरम्यान
बीच बीच में
ढल रही
नीली शाम
आसमान में बिखरा सन्नाटा
कुछ कहता-सा
अच्छा लगता है !

Friday, May 25, 2018

नींद और दुख

शाम से ही
कोई गहरा दुख उस पर फैल सा गया था !

ऐसा कुछ हुआ नहीं था बुरा अभी
बस कोई पुरानी बात
किसी बात का सिरा पकड़
ऊपर आ गयी थी !

आज देर सांझ
जल्दी
थक कर
सो गया वह !